कंप्यूटर क्या है -What Is Computer In Hindi ?

computer kya hai
computer kya hai

इस आर्टिकल में हम चर्चा करेंगे कि कंप्यूटर क्या है –What is Computer In Hindi ?

 कैसे हम कंप्यूटर को यूज करते हैं ? इसके अंतर्गत किस किस सब्जेक्ट को हमें पढ़ना पड़ता है इत्यादि |

कंप्यूटर शब्द की उत्पत्ति अंग्रेजी के “COMPUTE” शब्द से हुई है |

इसका का अर्थ होता है “गणना करना” |

इससे यह सिद्ध होता है की कंप्यूटर एक गणना करने वाला यंत्र  है |

कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है, जो  हमें  हमारे दिए गए निर्देशों के अनुसार परिणाम  प्रदान करती है |

यह पहले हम से डाटा को लेती है, फिर उस पर प्रोसेस करती है |

लास्ट में हमें हमारी आवश्यकता के अनुसार जैसे हमने निर्देश दिए हैं परिणाम प्रदान करती है |

क्योंकि कंप्यूटर का खुद का कोई दिमाग नहीं होता है अतः वह अपने आप कोई डिसीजन नहीं ले सकता है |

जैसी  कमांड  हम देते हैं उसी के अनुरूप यह हमें रिजल्ट देती है |

कंप्यूटर के द्वारा दिया गया रिजल्ट 100% सही और  एक्यूरेट होता है |

यदि हमने निर्देश ही गलत दिया है, तो उसमें कंप्यूटर की कोई गलती नहीं है |

वह हमेशा हमारे निर्देश के अनुसार ही हमें रिजल्ट प्रदान करता है |

क्योंकि वह खुद यह डिसीजन नहीं ले सकता कि हमारे द्वारा दिया गया निर्देश सही है या गलत |

इसीलिए हमें निर्देश देते समय अच्छी तरह से सोच लेना चाहिए की हमारा  निर्देश सही है या नहीं |

वर्तमान में यह केवल गणना करने तक सीमित नही है, बल्कि हर एक क्षेत्र में 100% ACCURACY से काम कर रहा है|

कृप्या करके ध्यान से सीख़िये कम्प्युटर की पूरी जानकारी हिन्दी में , मैं आपको इस लम्बे आर्टिक्ल में पूरी डीटेल में दे रहा हूँ|

 

कई बार मेरे से स्टूडेंट्स पूछते हैं – कम्प्युटर क्या है उसकी विशेषता बताए | आधा आन्सर मैने दे दिया है|

आधा नीचे लिखा है|

इसकी  अपनी निम्न खास योग्यताएँ हैं |

गति (Speed)

स्वचालन (Automation)

क्षमता (Capacity)

शुद्धता (Accuracy)

सार्वभोमिकता (Versatility)

विश्वसनीयता (Reliability)

उच्च संग्रहण क्षमता (High Storage Capacity)

इन सबके कारण यह हमारे जीवन के हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण होता जा रहा है |

कंप्यूटर  द्वारा न्यूनतम समय में अधिकतम गणनाएं की जा सकती है |

कम्प्यूटर द्वारा दिये गये परिणाम सही व  शुद्ध होते है |

इसकी विस्तृत व्याख्या हम धीरे-धीरे कर रहे हैं? कि कंप्यूटर क्या होता है?

INDEXING

कंप्यूटर क्या है ?

कंप्यूटर के भाग

(1) कंप्यूटर साफ्टवेयर

(2) कंप्यूटर हार्डवेयर

सीपीयू के मुख्य भाग

इनपुट डिवाइस

आउटपुट डिवाइस

कंप्यूटर की पीढ़ियां

कंप्यूटर के प्रकार

कंप्यूटर के उपयोग

कम्प्युटर के भाग ( Parts of a Computer) :-

इसके Parts को बड़े रूप से दो भागों में विभक्त किया गया है |

(1) कंप्यूटर साफ्टवेयर :-

जब हम कंप्यूटर पर काम करते हैं तो सबसे पहले हमें उससे कम्युनिकेट करने के लिए अर्थात बातचीत करने के लिए कुछ इंटरफ़ेस की जरूरत होती है |

यह  ऐसे इंटरफ़ेस होते हैं जो हमारे और कंप्यूटर हार्डवेयर के बीच में एक संबंध स्थापित करते हैं |

जिसकी सहायता से हम आसानी से कंप्यूटर से बातचीत कर लेते हैं अर्थात कम्युनिकेट कर लेते हैं |

कंप्यूटर सॉफ्टवेयर को हाथों से नहीं छू सकते हैं |

उन्हें सिर्फ यूज किया जा सकता है |

कंप्यूटर सॉफ्टवेयर दो प्रकार के होते हैं |

(i) सिस्टम सॉफ्टवेयर :-

ऐसे सॉफ्टवेयर जो सिस्टम को चलाने के लिए अर्थात कंप्यूटर को चलाने के लिए,

कंप्यूटर में इंस्टॉल होने जरूरी होते हैं, सिस्टम सॉफ्टवेयर कहलाते हैं |

जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम |

कम्प्युटर ओ एस क्या है :-

यह एक ऐसा सिस्टम सॉफ्टवेयर है,जो यूजर और कंप्यूटर हार्डवेयर के बीच एक विचोले का काम करता है

अर्थात एक मीडिएटर का काम करता है |

यह  यूज़र को एक ऐसा इंटरफ़ेस देता है जिसकी सहायता से  यूज़र आसानी से कंप्यूटर के साथ कम्युनिकेट कर लेता है |

मुख्य रूप से निम्नलीखित ऑपरेटिंग सिस्टम हैं |

(a) एमएस डॉस :-

यह एक सबसे पुराना ऑपरेटिंग सिस्टम है |

जिस की फुल फॉर्म होती है माइक्रोसॉफ्ट डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम |

यह कमांड लाइन ऑपरेटिंग सिस्टम है |

अर्थात जब हम इसके साथ कम्युनिकेट करते हैं तो हमें सभी निर्देशों को टाइप करना पड़ता है |

एमएस  डॉस एक सेंसिटिव सॉफ्टवेयर है |

यदि निर्देश लिखते समय थोड़ी सी गलती हो जाए तो हमें हमारा रिजल्ट प्राप्त नहीं होता है |

इसीलिए इसके बारे में पूरी जानकारी होने के बाद  हम इस पर काम कर सकते हैं |

बिना पूरी नॉलेज के इस पर काम करना असंभव है |

dos
DOS
(b) विंडोज :-

यह ऑपरेटिंग सिस्टम विजुअल कंपोनेंट्स पर आधारित है |

इस पर काम करना डॉस पर काम करने से बहुत ज्यादा आसान है |

इस ऑपरेटिंग सिस्टम को  थोड़ी सी गाइडलाइन के बाद  ऑपरेट किया जा सकता है |

जो विजुअल कंपोनेंट्स इसमें यूज होते हैं, उनको आइकंस बोलते हैं |

ये आइकंस डेस्कटॉप पर व्यवस्थित होते हैं |

इन आइकंस  की सहायता से किसी भी सॉफ्टवेयर के अंदर आसानी से जाया जा सकता है |

तथा किसी भी सॉफ्टवेयर को ऑपरेट किया जा सकता है |

यदि किसी फाइल को हमने डेस्कटॉप पर सेव करके रखा है ,

तो उस आइकन पर डबल क्लिक करके खोला जा सकता है |

यह बहुत आसान मेथड है |

windows
Windows

निम्नलिखित कई प्रकार की विंडोज बाजार में अवेलेबल है |

  • विंडोज एक्सपी (Windows XP)
  •  विस्ता ( Vista)
  •  2008 (Win 2008)
  • विंडोज 2010 (Windows 2010)
(c) यूनिक्स :-

यह  एक बहुत ही सॉलिड ऑपरेटिंग सिस्टम है |

यह डॉस की तरह ही काम करता है |

इस ऑपरेटिंग सिस्टम में  कमांड लाइन इंटरफेस यूज होता है |

इसमें काम करना बहुत मुश्किल होता है , क्योंकि इसकी पूरी नॉलेज होनी आवश्यक होती है |

निर्देशों को पूर्ण रूप से लिखकर  ही  इच्छित रिजल्ट प्राप्त किया जा सकता है |

यह ऑपरेटिंग सिस्टम  ज्यादा लोड लेता है, अर्थात यह बहुत हैवी  ऑपरेटिंग सिस्टम है |

(d) लिनक्स :-

यह अब तक का सबसे सॉलिड ऑपरेटिंग सिस्टम   है |

इस ऑपरेटिंग सिस्टम में काम करना बहुत ही ज्यादा सिक्योर है |

यह ऑपरेटिंग सिस्टम लाइटवेट है,अर्थात ज्यादा लोड नहीं लेता है |

इस पर काम करना बहुत आसान है |

(ii) एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर :-

ऐसे सॉफ्टवेयर  जो  कंप्यूटर पर कार्य करने के लिए आवश्यक होते हैं , एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर कहलाते हैं |

ये सॉफ्टवेयर कंप्यूटर में होने आवश्यक नहीं है |

यदि आपके कार्य के लिए यह नहीं चाहिए तो आप जिस प्रकार का काम करना चाहते हैं,

उसके लिए जो सॉफ्टवेयर चाहिए उन्हें एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर कहते हैं |

उदाहरण के लिए अगर आप फोटो स्टूडियो का काम करते हैं

तो आपके कंप्यूटर में फोटोशॉप नाम का एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर इंस्टॉल होना चाहिए ,

तभी आप फोटो स्टूडियो का काम आसानी से कर सकते हैं ,

अन्यथा आपको आपका काम बाजार से करवाना पड़ेगा |

photoshop 7
Photoshop 7

और यदि आप न्यूज़ एडिटर हैं , किसी न्यूज़ पेपर एजेंसी के लिए काम कर रहे हैं

तो आपके कंप्यूटर में  पेजमेकर नाम का एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर इंस्टॉल होना अति आवश्यक है |

अन्यथा आप न्यूज़ की एडिटिंग नहीं कर सकते हो |

यदि आप अकाउंट्स का काम करते हो तो आपके कंप्यूटर सिस्टम में Tally or Busy नाम का सॉफ्टवेयर

इंस्टॉल होना चाहिए अन्यथा आप सिस्टम पर अकाउंट का काम नहीं कर सकते हो |

यदि आप अपने प्रोजेक्ट को  रिप्रेजेंट करना चाहते हो तो पावर पॉइंट नाम के एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर जो कि

एमएस ऑफिस सॉफ्टवेयर का एक  भाग है को इंस्टॉल करना पड़ेगा |

यदि आप एक ऐसी सीट तैयार करना चाहते हैं

जिसमें आप बहुत सारे फार्मूला और  चार्ट शो करना चाहते हैं

तो आपको एक्सेल नाम के एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर,

जो कि एमएस ऑफिस सॉफ्टवेयर का एक भाग है को इंस्टॉल करना पड़ेगा |

यदि आप एमएस ऑफिस सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल कर लेते हो तो इस सॉफ्टवेयर के पैकेज में लगभग 10 ऐसे सॉफ्टवेयर हैं

जो ऑफिस में काम करने के लिए अति आवश्यक है |

सभी अपने आप इंस्टॉल हो जाते हैं |

ऊपर जो मैंने एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर बताएं उनकी जगह आजकल अलग-अलग कंपनियों के बनाए हुए दूसरे सॉफ्टवेयर भी आते हैं |

अगर आप उन्हें यूज़ करना चाहते हैं तो भी आप अपना काम कर सकते हैं |

मैंने  जो एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर बताएं वह सभी स्टैंडर्ड के सॉफ्टवेयर हैं और यदि आप उनका यूज़ करते हैं

तो उससे अच्छी परफॉर्मेंस आपको और कोई सॉफ्टवेयर नहीं दे सकता है |

 

(2) कंप्यूटर हार्डवेयर :-

कंप्यूटर के सभी पार्ट्स , जो मिला कर एक पूरा कंप्यूटर सिस्टम तैयार होता है, कंप्यूटर हार्डवेयर कहलाता है |

यह सभी पार्ट्स हाथों से  छुए जा सकते हैं |

कंप्यूटर के मुख्य हार्डवेयर निम्नलिखित हैं |

(A) सी पी यू :-

इसे सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट भी  कहा जाता है |

यह कंप्यूटर का दिमाग होता है |

कंप्यूटर के सारे कार्य इसी के द्वारा किए जाते हैं |

कंप्यूटर सिस्टम में  सबसे महंगा पार्ट सीपीयू ही होता है |

यह कंप्यूटर सिस्टम का एक छोटा सा पार्ट है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है |

CPU(MICRO PROCESSOR)
CPU(MICRO PROCESSOR)


सीपीयू में निम्नलिखित 3 मुख्य भाग होते हैं |

ए एल यू :-

इस  भाग को अर्थमैटिक एंड लॉजिकल यूनिट भी कहा जाता है |

इसके द्वारा गणना से संबंधित कंप्यूटर के सारे काम किए जाते हैं |

किसी भी प्रकार का कोई निर्णय लेना हो तो इसी के द्वारा लिया जाता है |

यह सीपीयू का एक महत्वपूर्ण भाग है |

एम यू :-

इस भाग को मेमोरी यूनिट कहा जाता है |

कंप्यूटर में कोई भी डाटा , प्रोसेसिंग के लिए आता है, तो उसे स्थाई या अस्थाई रूप से कंप्यूटर को सेव करके रखना पड़ता है |

एम यू के द्वारा ही उसे स्पेस दिया जाता है |

यदि एम यू ना हो तो कंप्यूटर का कोई भी डाटा   सेव नहीं होगा |

सी यू :-

इस  भाग को कंट्रोल यूनिट भी कहा जाता है |

जो कार्य ए एल यू से नहीं होता है उस कार्य को  कंट्रोल करने का काम सी यू के द्वारा किया जाता है |

सीपीयू का यह भाग पूरे कंप्यूटर सिस्टम की कार्यप्रणाली  को नियंत्रण में रखने का काम करता है |

(B) हार्ड डिस्क :-

यह कंप्यूटर की एक ऐसी संग्रहण इकाई है जो कंप्यूटर का ऐसा डाटा , जिसे  स्थाई रूप से सेव करना है, उसे स्टोर करके रखती है |

इसमें सेव किया हुआ डाटा फ्यूचर में कभी भी यूज किया जा सकता है |

यह एक परमानेंट मेमोरी है |

(C) पावर सप्लाई :-

कंप्यूटर सिस्टम को चलने के लिए , जिस एनर्जी की जरूरत होती है अर्थात बिजली की जरूरत होती है , वह पावर सप्लाई के द्वारा उपलब्ध करवाई जाती है| यह कार्य एसएमपीएस के द्वारा किया जाता है |

(D) मदर बोर्ड :-

यह कंप्यूटर सिस्टम का एक ऐसा बोर्ड है जिस पर कंप्यूटर के सभी कंपोनेंट्स को अटैच कर दिया जाता है , और इस प्रकार सभी आपस में मिलकर एक कंप्यूटर सिस्टम का निर्माण करते हैं

और दिए गए कार्य को पूरी  एक्यूरेसी के साथ पूरा करते हैं |

motherboard
Motherboard

(E) सी डी ड्राइव :-

यह  एक ऐसी  ड्राइव है , जो सीडी या डीवीडी के साथ कम्युनिकेट करने के काम में ली जाती है |

सी डी – कंपैक्ट डिस्क

डी वी डी – डिजिटल  वर्सेटाइल  डिस्क या डिजिटल वीडियो डिस्क

(F) कैबिनेट :-

जब हम कंप्यूटर सिस्टम के सभी कंपोनेंट्स को आपस में जोड़कर या अटैच करके कवर करना चाहते हैं,

तो उसकी कवरिंग के लिए जिस बॉक्स का यूज करते हैं उसे कैबिनेट कहते हैं |

आमतौर पर ज्ञान की कमी की वजह से कैबिनेट को  ही सीपीयू कहा जाता है , लेकिन यह बिल्कुल गलत है | कैबिनेट का साइज बहुत बड़ा अर्थात लगभग  माचिस के एक बड़े बॉक्स के जितना  होता है,

जबकि सीपीयू का साइज दो माचिस के आकार के जितना होता है |

cabinet
Cabinet

(G) यू  पी  एस :-

इसे Uninterruptible Power Supply कहा जाता है |

जब कंप्यूटर का मैन पावर सप्लाई  फ़ैल हो जाता है , तो यह हमें हमारे कम्प्यूटर के लिए पावर देता है |

यू  पी  एस
यू  पी  एस

(H) प्रोजेक्टर :-

इस  डिवाइस  की सहायता से कम्प्यूटर के परिणाम को बड़ी स्क्रीन पर दिखाया जाता है |

जिससे प्रेजेंट करना , सिखाना व सीखना आसान हो जाता है |

प्रोजेक्टर
प्रोजेक्टर

 

इस प्रकार हमने समझा कि कंप्यूटर क्या है ? (What is Computer)

कंप्यूटर में इनपुट और आउटपुट करने के लिए दो प्रकार की डिवाइसेज होती है |

इनपुट डिवाइसज :-

ऐसी डिवाइस जिसकी सहायता से हम कंप्यूटर में इनपुट कर सकते हैं अर्थात कंप्यूटर को कोई निर्देश दे सकते हैं, इनपुट डिवाइस कहलाती है |

कंप्यूटर सिस्टम में निम्नलिखित प्रकार की इनपुट डिवाइसेज का यूज किया जाता है |

की बोर्ड :-

यह एक ऐसी इनपुट डिवाइस है जिस पर लगभग 110  बटन या  कीज होती हैं |

इन  बटनो की सहायता से हम किसी भी प्रकार के डाटा को कंप्यूटर में निर्देश के रूप में इंटर कर सकते हैं |

यह सबसे महत्वपूर्ण इनपुट डिवाइस है |यह डिवाइस यूजर फ्रेंडली होती है |

इसकी सहायता से काम करना बहुत आसान होता है |

की बोर्ड
की बोर्ड

माउस :-

यह एक ऐसी इनपुट डिवाइस है जिस पर दो या तीन बटन होते हैं |

पहले बटन को लेफ्ट बटन तथा लास्ट बटन को राइट बटन कहते हैं |

मुख्य रूप से हमें लेफ्ट बटन को प्रेस करना होता है |

कुछ विशेष प्रकार के इनपुट करने के लिए हमें राइट बटन का भी इस्तेमाल करना पड़ता है |

जैसे ही हम बटन प्रेस करते हैं इनपुट कंप्यूटर में इंटर हो जाता है |

आजकल माउस में एक बीच का बटन होता है जिससे  स्क्रोल किया जाता है |

इसकी शेप चूहे के जैसी होती है, इसीलिए इसे माउस कहा जाता है |

माउस
माउस

जॉय स्टिक :-

यह एक ऐसी इनपुट डिवाइस है जिसको बच्चों के द्वारा वीडियो गेम खेलने के समय इनपुट देने के लिए यूज़ किया जाता है |

इस डिवाइस पर एक स्टिक लगी होती है उसी को घुमा कर इनपुट दिया जाता है और बच्चे इंजॉय करते हैं |

इसीलिए इसका नाम जॉयस्टिक रखा गया है |

लाइट पेन :-

यह एक ऐसी इनपुट डिवाइस है जिसकी सहायता से हम अपनी राइटिंग में कोई भी डाटा लिखकर कंप्यूटर में इंटर करवा सकते हैं |

इसके द्वारा कंप्यूटर स्क्रीन पर (यदि वह इसके कंपैटिबल है तो)  लिखा जा सकता है |

यह एक बहुत महत्वपूर्ण इनपुट डिवाइस है |

स्कैनर :-

यह एक ऐसी इनपुट डिवाइस है जिसकी सहायता से किसी भी प्रकार के पेज पर लिखे हुए या प्रिंट किए हुए डाटा को कंप्यूटर में इंटर करवाया जा सकता है |

इसमें एक ग्लास की प्लेट होती है उस पर नीचे की तरफ फेस करके पेज को रख दिया जाता है और इस प्रकार उस पेज पर लिखा हुआ डाटा कंप्यूटर में इंटर कर जाता है |

यदि वह कोई इमेज है तो वह इमेज के फॉर्मेट में कंप्यूटर में इंटर  कर जाती है |

आउटपुट डिवाइस :-

ऐसी डिवाइस जिसकी सहायता से हम कंप्यूटर  से परिणाम प्राप्त कर सकते हैं अर्थात आउटपुट ले सकते हैं, आउटपुट डिवाइस कहलाती है |

मॉनिटर :-

यह एक ऐसी आउटपुट डिवाइस है जिसकी सहायता से कंप्यूटर हमें परिणाम डिस्प्ले करता है |

हम आसानी से सॉफ्ट कॉपी में वह परिणाम देख सकते हैं |

इसे डिस्प्ले यूनिट भी कहा जाता है |

इसे डिस्प्ले स्क्रीन भी कहा जाता है |

स्पीकर :-

यह  एक ऐसी आउटपुट डिवाइस है जिसकी सहायता से हम साउंड के रूप में परिणाम प्राप्त कर सकते हैं |

इस डिवाइस का उपयोग हम सॉन्ग सुनने में भी करते हैं |

प्रिंटर :-

यह एक ऐसी आउटपुट डिवाइस है जिसकी सहायता से हार्ड कॉपी के रूप में अर्थात पेज पर हम आउटपुट प्राप्त कर सकते हैं |

प्रिंटर
प्रिंटर

प्लॉटर :-

यह एक ऐसी आउटपुट डिवाइस है जिसकी सहायता से हम एक पेज पर आउटपुट प्राप्त कर सकते हैं |

इसकी सहायता से नक्शे और बड़े-बड़े चार्ट प्रिंट किए जा सकते हैं |

इस प्रकार हमने समझा कि कंप्यूटर क्या है ?

कंप्यूटर के द्वारा दिए गए परिणाम मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं |

सॉफ्ट कॉपी परिणाम :-

ऐसे परिणाम जो हमें कंप्यूटर डिस्पले में दिखाई देते हैं , सॉफ्ट कॉपी परिणाम कहलाते हैं |

जब कंप्यूटर हमें डिस्प्ले स्क्रीन पर कोई परिणाम शो करता है तो इस प्रकार के परिणाम को सॉफ्ट कॉपी कहते हैं |

इन परिणामों को हम अपने हाथों से छू नहीं सकते हैं |

हार्ड कॉपी परिणाम :-

ऐसे परिणाम जो हमें पेज पर प्रिंट करके दिए जाते हैं, हार्ड कॉपी परिणाम कहलाते हैं |

जैसे प्रिंटर जब हमें परिणाम को कोई पेज पर प्रिंट करके देता है तो उस परिणाम को हार्ड कॉपी परिणाम कहते हैं |

हार्ड कॉपी परिणाम को हम छू सकते हैं |

कंप्यूटर की पीढ़ियां हिन्दी में :-

पहली पीढ़ी(1942-1955) :-

इस पीढी के कंप्यूटर में वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tube) का प्रयोग किया जाता था |

इन  कंप्यूटर का आकार बहुत  लार्ज होता था| बिजली भी बहुत अधिक कंज्यूम होती थी।

इन कंम्यूटरों में ऑपरेंटिग सिस्टम नहीं होता था |

प्रोग्रामों को पंचकार्ड में स्टोर करके रखा जाता था।

इसमें डाटा स्टोर करने की क्षमता बहुत कम होती थी ।

इन कंप्यूटरों में  मशीनी भाषा का प्रयोग किया जाता था ।

यह कंप्यूटर मिली सेकंड में  कैलकुलेशन करते थे |

एक वैक्यूम ट्यूब आधा वाट बिजली कंज्यूम करती थी |

इस समय एक कंप्यूटर में कम से कम 10000  वैक्यूम ट्यूब का प्रयोग किया जाता था |

इन  कंप्यूटरों को ठंडी जगह पर रखा जाता था |

दूसरी पीढ़ी (1955-1964) :-

दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में ट्रांजिस्टर का प्रयोग किया जाता था |

ट्रांजिस्टर वैक्यूम ट्यूब से काफी अच्छा था।

जोहन बोर्डिंन , वीलियन शोकले , वाल्टर ब्रैटेन ने ट्रांजिस्टर की खोज सन 1947 में की थी |

इसके साथ दूसरी पीढी के कंप्‍यूटरों में  असेंबली भाषा का उपयोग किया जाता था |

लेकिन डाटा स्‍टोर करने के लिये पंचकार्ड का इस्‍तेमाल किया जाता था |

इस पीढी में  FORTRAN , कोबोल , अलगोल, स्नोबॉल आदि हाई लेवल लैंग्वेज का विकास हुआ |

बैच ऑपरेटिंग सिस्टम  भी इस पीढी के दौरान आया |

तीसरी पीढ़ी(1964-1975) :-

इस पीढी के कंप्यूटर में इंटीग्रेटेड सर्किट (Integrated Circuit) का प्रयोग किया जाता था |

1958 में Jack St. Clair Kilby and Robert Noyce ने मिलकर फर्स्ट आईसी बनाया|

इन कंम्यूटरों की गति माइक्रो सेकंड से नेनो सेकंड तक की थी |

आई सी के आकार के  छोटा होने के कारण , इस पीढी के कंप्यूटर आकार में छोटे हो गए |

इस पीढ़ी में उच्च स्तरीय भाषा PL/1 ,पास्कल और बेसिक का विकास हुआ।

चौथी पीढ़ी(1975-1989) :-

इस पीढ़ी के कंप्यूटर में  चिप तथा माइक्रोप्रोसेसर  का  उपयोग होने लगा|

इससे कंप्यूटरों का आकार और कम हो गया व इनकी कार्य क्षमता बढ गयी।

चुम्बकीय डिस्क की जगह अर्धचालक मैमोरी का प्रयोग होने लगा था|

इस पीढ़ी के दौरान लैन और वैन का विकास हुआ|

इसके अलावा ऑपरेटिंग  सिस्टम एमएस डॉस  का विकास हुआ|

इस पीढ़ी में एमएस विंडोज व  सी लैंग्वेज का विकास हुआ |

सी लैंग्वेज एक हाई लेवल लैंग्वेज थी |

इस दौरान GUI का भी आगमन हुआ|

पांचवीं पीढ़ी(1989-अब तक) :-

इस पीढ़ी के दौरान अल्ट्रा लार्ज स्केल इंटीग्रेशन, ऑप्टिकल डिस्क, पोर्टेबल पीसी, टेबलेट, इंटरनेट,

ई-मेल, डब्लू डब्लू डब्लू, विंडोज एक्सपी , आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विकास हुआ |

इस प्रकार कंप्यूटर का आकार बहुत छोटा हो गया तथा उसकी स्पीड बढ़ गई| वह कम जगह में ज्यादा डाटा स्टोर करने लगा|

कंप्यूटर के प्रकार इन हिन्दी:-

प्रकारों को बड़े रूप से तीन भागों में बांटा गया है , जो निम्नलिखित हैं|

आकार के आधार पर :-

कंप्यूटर को आकार के आधार पर निम्नलिखित चार प्रकार के कंप्यूटर  में बांटा गया है|

माइक्रो कंप्यूटर :-

यह कंप्यूटर आकार में बहुत छोट होते हैं , इसीलिए इनका नाम माइक्रोकंप्यूटर रखा गया है |

इन कंप्यूटर का विकास सन 1970 में किया गया था |

इनको मुख्य रूप से फाइल बनाने के लिए यूज किया जाता था |

जो व्यापारी  अकाउंट का काम करते हैं , वह भी माइक्रोकंप्यूटर को ज्यादा पसंद करते हैं|

मिनी कंप्यूटर :-

मिनी कंप्यूटर का साइज और कीमत दोनों ही माइक्रो कंप्यूटर से ज्यादा  होते हैं|

इनकी कार्य करने की क्षमता माइक्रो कंप्यूटर से ज्यादा होती है, क्योंकि इनमें एक से ज्यादा सीपीयू होते हैं|

ऐसे कंप्यूटर एक आम आदमी की पहुंच से बाहर होते हैं, क्योंकि इनका प्राइस ज्यादा होता है|

इस कंप्यूटर पर एक साथ कई व्यक्ति काम कर सकते हैं| हर प्रकार के कार्य के लिए यह कंप्यूटर उपयोगी हैं|

Digital Equipment Corporation ने 1965 में एक मिनी कंप्यूटर का निर्माण किया|

इस कंप्यूटर का नाम PDP-8 रखा गया| इसकी कीमत उस समय $18000 रखी गई थी|

यह कंप्यूटर आकार में वाशिंग मशीन से भी बड़ा था|

मेनफ्रेम कंप्यूटर :-

इन कंप्यूटर की प्रोसेसिंग  पावर मिनी कंप्यूटर से ज्यादा होती है| ये कंप्यूटर आकार में बड़े होते है।

इनमें अधिक मात्रा में   डाटा को तीव्र गति से प्रोसेस करने की क्षमता होती है।

इन कंप्यूटर का यूज सरवर के रूप में भी किया जाता था| यह कंप्यूटर इतना उपयोगी

था, कि इस पर एक साथ हजारों यूज़र लगातार काम कर सकते थे| उदाहरण के लिए

IBM 4381, ICL 39 Series और CDC Cyber Series ये कुछ मेनफ्रेम कंप्यूटर है।

सुपर कंप्यूटर :-

आज  के कंप्यूटरों में  सुपर कंप्यूटर सबसे बड़े, ज्यादा क्षमता वाले, अधिक संग्रह क्षमता वाले होते है।

इनमें कई प्रोसेसर एक साथ काम करते है और बड़ी से बड़ी समस्या का तुरंत ही समाधान करते हैं|

सुपर कंप्यूटर एक सेकंड में एक अरब गणनाए कर सकता है|

सुपर कंप्यूटर में एक से अधिक  सीपीयू होते है,

और इस कंप्यूटर पर एक से अधिक व्यक्ति काम कर सकते है।

इन कंप्यूटर का उपयोग मौसम संबंधी अनुसंधान, अंतरिक्ष यात्रा, सैन्य और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए किया जाता है।

‘परम 10000’  नाम का एक सुपर कंप्यूटर सबसे शक्तिशाली है|

उद्देश्य के आधार पर :-

उद्देश्य के आधार पर कंप्यूटर को दो भागों में बांटा गया है जो निम्नलिखित हैं|

जनरल पर्पज कंप्यूटर :-

जैसा कि नाम से स्पष्ट होता है, यह ऐसे कंप्यूटर हैं जिनका उपयोग सामान्य कार्य के लिए किया जाता है|

जैसे ऑफिस के  फाइल बनाने के कार्य , कोई लेटर तैयार करने  वाले काम आदि |

इसमें उपलब्ध प्रोसेसर ज्यादा क्षमता वाला नहीं होता है ,

इसीलिए ऐसे कंप्यूटर स्पेशल काम नहीं कर सकते हैं |

स्पेशल पर्पज कंप्यूटर :-

जैसा कि नाम से स्पष्ट होता है, ये ऐसे कंप्यूटर हैं जिनका उपयोग कुछ स्पेसिफिक कार्यों के लिए किया जाता है|

जैसे वैज्ञानिकों के कार्य , मौसम विभाग  से संबंधी कार्य , कृषि विज्ञान से संबंधित कार्य , इंजीनियरिंग से संबंधित कार्य , मेडिकल से संबंधित कार्य ,  ट्रेन और वायुयान से संबंधित रिजर्वेशन सेंटर के कार्य आदि|

कार्यप्रणाली के आधार पर :-

कार्यप्रणाली के आधार पर कंप्यूटर को  निम्नलिखित तीन भागों में बांटा गया है|

एनालॉग कंप्यूटर :-

ऐसा कंप्यूटर जिसकी सहायता से दाब , तापमान , गति , लंबाई , प्रतिरोध , ऊंचाई इत्यादि भौतिक  मात्राओं को नापा जाता है , एनालॉग कंप्यूटर कहलाते हैं|
एनालॉग कंप्यूटर के उदाहरण :- थर्मामीटर, एनालॉग घड़ी, स्पीडोमीटर आदि।

डिजिटल कंप्यूटर :-

ऐसे कंप्यूटर  जो डिजिट पर काम करते हैं , डिजिटल कंप्यूटर कहलाते हैं |

यह कंप्यूटर बाइनरी नंबर सिस्टम पर काम करते हैं ,  जिसमें दो बाइनरी डिजिट होती है 0 और 1 |

हर प्रकार के क्षेत्र में डिजिटल कंप्यूटर का यूज किया जाता है|

आजकल ज्यादातर यूज होने वाले कंप्यूटर सिस्टम डिजिटल कंप्यूटर ही हैं |

डिजिटल कंप्यूटर के उदाहरण :- पर्सनल कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल आदि।

हाइब्रिड कंप्यूटर  :-

ऐसे कंप्यूटर जिनमें एनालॉग तथा डिजिटल दोनों प्रकार के कंप्यूटर के गुण पाए जाते हैं , हाइब्रिड कंप्यूटर कहलाते हैं|

इस कंप्यूटर का उपयोग चिकित्सा में होता है|

एनालॉग कंप्यूटर किसी रोगी के तापमान या रक्तचाप को नापता है, और बाद में  परिणाम को अंक में बदल  देता है।

इससे रोगी के स्वास्थ्य के बारे  में सही रिपोर्ट  प्राप्त होती है।

हाइब्रिड कंप्यूटर के  उदाहरण :-

फ्यूल फ्लो मेजरमेंट:- इस कनवर्टर की सहायता से क्वांटिटी को प्राइस वैल्यू में कन्वर्ट किया जाता है ,

ब्लड प्रेशर  और टेंपरेचर मेजर करने के लिए  डिवाइस , वैज्ञानिक  गणनाए करने के लिए डिवाइस , रक्षा में ,  रडार सिस्टम में हाइब्रिड कंप्यूटर का उपयोग किया जाता है |

इस प्रकार हमने समझा कि What is Computer ?

कंप्यूटर के लाभ :-

कंप्यूटर के प्रॉफ़िट इतने ज्यादा हैं कि हम इनको लिख नहीं सकते हैं |

क्योंकि आजकल हर एक क्षेत्र में कंप्यूटर का महत्वपूर्ण योगदान हो गया है |

किसी भी प्रकार का सरकारी काम करने के लिए हमें ऑफिस में जाने की जरूरत नहीं है,

क्योंकि कंप्यूटर पर बैठे-बैठे इंटरनेट की सहायता से हम किसी भी प्रकार का काम कर सकते हैं|

यदि हमें किसी चीज की जरूरत है तो भी हम इंटरनेट में वेबसाइट की सहायता से उन चीजों को मंगवा सकते हैं |

खाना भी यदि हमें घर पर नहीं बनाना है, तो आसामी से हम होटल से ऑर्डर कर सकते हैं ऑनलाइन, इंटरनेट की सहायता से |

इसी प्रकार हमें कोई भी काम के लिए घर से बाहर जाने की जरूरत नहीं है , कंप्यूटर  ने  हमारी जिंदगी बदल दी है |

इसने हमारी जिंदगी को इतना आसान बना दिया है , कि हमें हमारे शरीर को किसी भी प्रकार का कष्ट देने की जरूरत नहीं है|

कंप्यूटर से हानियां :-

कंप्यूटर से LOSES भी बहुत हैं | जैसे ही कंप्यूटर ने हमारी जिंदगी में प्रवेश किया है, हमारा रूटीन  पूर्ण रूप से चेंज हो चुका है|

अब हमें कोई काम करने के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं है|

हमारा शरीर आलसी होता जा रहा है , क्योंकि शरीर  कोई एक्सरसाइज नहीं करता है|

इसीलिए शरीर में बीमारियां बढ़ती जा रही है|

जितने भी स्थानीय व्यापार थे वह सब खत्म होते जा रहे हैं , क्योंकि आजकल हर एक आदमी कंप्यूटर की सहायता से घर पर बैठा बैठा कोई भी चीज मंगवा सकता है |

खेती भी खत्म होती जा रही है क्योंकि आजकल हाइब्रिड खेती होती है ,जिसमें पहले से ही हमें  यह जानकारी होती है

कि कितना इन्वेस्टमेंट होगा और कितनी इनकम आएगी |

इसलिए हर किसान का रुझान इसी प्रकार की कृषि पर जा रहा है लेकिन इस प्रकार की कृषि से प्राप्त सब्जियां  व फल अच्छे नहीं होते हैं और शरीर में बीमारियां पैदा करते हैं , क्योंकि इनको पैदा करने में बहुत से केमिकल्स का यूज किया जाता है|

घर पर कंप्यूटर में गेम अवेलेबल होने के कारण बच्चे सारा दिन यही काम करते हैं |

उनकी आंखें कमजोर हो जाती हैं |

पढ़ाई में वह ध्यान नहीं देते हैं | उनकी शारीरिक ग्रोथ नहीं हो पाती है |

इस प्रकार कंप्यूटर से जितने फायदे हैं,उतने ही नुकसान भी हैं |

यदि कंप्यूटर को सोच समझ के सिस्टम से यूज किया जाए तो कंप्यूटर हमारे लिए वरदान है |

लेकिन अगर बिना सोचे समझे इसका यूज किया जाए तो कंप्यूटर हमारे लिए अभिशाप है |

कंप्यूटर के क्या फायेदे है ( Applications of Computer) :-

जहां तक इनकी बात है आज दुनिया में कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है

जहां कंप्यूटर के बिना काम चल रहा हो |

इन दिनों कंप्यूटर बिजनेस की रीड की हड्डी बन गया है |

जिस प्रकार व्यक्ति अपनी रीड की हड्डी के बिना कुछ नहीं कर सकता है ,

उसी प्रकार व्यापार में भी यह साबित हो गया है  की कंप्यूटर के बिना वह नहीं चल सकता है |

सही मायने में तो हम यह नहीं बता सकते हैं कि कंप्यूटर किन-किन क्षेत्रों में ,

कैसे-कैसे काम कर रहा है | क्योंकि इसका कार्यक्षेत्र बहुत ज्यादा व्यापक हो गया है |

लेकिन फिर भी कुछ मुख्य व्यापार में यह कैसे उपयोग हो रहा है? निम्न प्रकार से समझा जा सकता है|

विज्ञान के क्षेत्र में :-

विज्ञान के क्षेत्र में कंप्यूटर का क्या उपयोग होता है?

इस प्रश्न का  उत्तर हमें ढूंढने की जरूरत नहीं है| एक बहुत बड़ा क्षेत्र ,

जिसे कंप्यूटर साइंस के नाम से जाना जाता है केवल और केवल कंप्यूटर की वजह से ही बनाया गया है| इसमें कंप्यूटर के द्वारा हम क्या क्या कर सकते हैं

तथा सब कुछ करने के लिए कौन-कौन सी प्रक्रिया है , और इन्हें किस प्रकार से अप्लाई किया जा सकता है |

हर एक विषय को विस्तृत रूप से अलग अलग सब ब्रांच में डिवाइड करके डिटेल में समझाया गया है |

इन सभी विषयों में अलग-अलग क्षेत्र में किस प्रकार से कंप्यूटर को यूज किया जा सकता है , उसकी भरपूर सूचना दी गई है|

इसको थ्योरी के माध्यम से तथा प्रैक्टिकल के माध्यम से पूर्ण रूप से समझाया गया है |

जो विद्यार्थी इसे डिटेल में पढ़ते हैं उनके लिए कुछ विषय निम्नलिखित हैं |

ओ एस :-

इस विषय का नाम है ऑपरेटिंग सिस्टम |

इसमें विद्यार्थियों को यह बताया जाता है कि किस प्रकार से कंप्यूटर और

कंप्यूटर पर काम करने वाले व्यक्ति के बीच में एक इंटरफ़ेस तैयार किया जाता है |

वह इंटरफ़ेस एक प्रकार का सॉफ्टवेयर है , जिसे सिस्टम सॉफ्टवेयर कहते हैं|

ओ एस इसी प्रकार का एक सिस्टम सॉफ्टवेयर है|

डी एस :-

इस  विषय का नाम डाटा स्ट्रक्चर है |

इसमें किस प्रकार से कंप्यूटर सिस्टम में डाटा को स्टोर किया जाता है , इस विषय को  विस्तार से समझाया गया है|

डी सी एन :-

इस विषय का नाम   डाटा कम्युनिकेशन एंड नेटवर्किंग है |

इस विषय में विस्तार से यह समझाया गया है कि किस प्रकार से दो डिवाइसेज का आपस में कम्युनिकेशन होता है और उसमें किस किस प्रकार की डिवाइसेज की जरूरत होती है |

सी भाषा :-

इस भाषा को सी लैंग्वेज कहा जाता है |

इसकी सहायता से बड़े-बड़े प्रोग्राम लिखे जाते हैं , जो वास्तविक संसार में काम आने वाले होते हैं |

इसकी सहायता से बड़े-बड़े गेम भी डिजाइन किए जाते हैं,

जिन्हें इंटरटेनमेंट के रूप में हमारे द्वारा यूज़ किया जाता है |

सी प्लस प्लस  :-

इस भाषा को सी प्लस प्लस लैंग्वेज कहा जाता है| यह भी सी भाषा की तरह ही काम करती है |

लेकिन सी लैंग्वेज का  बड़ा  रूप है |

इसमें एक नया  कंसेप्ट जोड़ा गया है जिसे ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड पैराडिज्म कहा जाता है |

क्योंकि यह लैंग्वेज इस कंसेप्ट का यूज करती है इसीलिए इसे ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग लैंग्वेज कहा जाता है|

इसके द्वारा भी बड़े-बड़े सॉफ्टवेयर और गेम बनाए जाते हैं जो हमारी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं ,

और हमारे लिए हर काम को आसानी से और तेजी से पूरा करते हैं |

पी एच पी :-

इस लैंग्वेज का नाम है  पीएचपी प्रीप्रोसेसर हाइपर टेक्स्ट |

इसकी सहायता से वेबसाइट बनाई जाती है |

इन वेबसाइट की सहायता से हम हमारी रियल लाइफ की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं |

हम किसी दूसरी जगह पर बैठे-बैठे हमारा खुद का पर्सनल काम आसानी से कर सकते हैं |

चाहे वह पढ़ने से संबंधित हो ,चाहे सीखने से संबंधित हो ,

चाहे सिखाने से संबंधित हो ,चाहे बिजली का बिल भरना हो, चाहे किसी भी प्रकार का बिल भरना हो |

यह लैंग्वेज बहुत आसानी से सीखी जा सकती है |

एच टी एम एल :-

इस लैंग्वेज का नाम है हाइपर टेक्स्ट मार्कअप लैंग्वेज | यह एक बहुत महत्वपूर्ण लैंग्वेज है |

इस लैंग्वेज के बिना इंटरनेट पर कुछ भी पब्लिश करना संभव नहीं है |

यदि कोई भी वेबसाइट बनाई जाती है तो चाहे वह किसी भी लैंग्वेज में बनाई जाए

उसके कोडिंग में एच टी एम एल को शामिल करना अति आवश्यक है अन्यथा वह इंटरनेट से जुड़ नहीं सकती है |

जावा :-

यह एक प्योर ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड लैंग्वेज है जिसका नाम है जावा | आजकल यह बहुत प्रसिद्ध लैंग्वेज है क्योंकि यह लैंग्वेज प्लेटफॉर्म इंडिपेंडेंट है |

इसलिए यह हर एक मशीन पर काम कर जाती है |

इसलिए हर एक मशीन का सॉफ्टवेयर आजकल जावा में तैयार किया जाता है |

इसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की सहायता से एंड्राइड मोबाइल के सॉफ्टवेयर भी तैयार किए जाते हैं |

एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम का सारा काम जावा की सहायता से ही किया जाता है |

डॉट नेट :-

इस लैंग्वेज का नाम डॉट नेट है | यह लैंग्वेज भी पीएचपी की तरह सॉफ्टवेयर बनाने के काम आती है , लेकिन इसमें काम करना थोड़ा मुश्किल है और उसको इंप्लीमेंट करना भी ज्यादा कोस्टली होता है|

एस क्यू एल :-

यह एक डेटाबेस की लैंग्वेज है | इसे बैक एंड की लैंग्वेज भी बोलते हैं ,क्योंकि इसकी सहायता से डाटा स्टोरेज से रिलेटेड सारा काम किया जाता है |

यदि यह लैंग्वेज नहीं हो तो आज के इस समय में कोई भी डाटा स्टोर नहीं होगा और हमारा किया हुआ सारा कार्य व्यर्थ हो जाएगा |

इसीलिए यह लैंग्वेज डाटा स्टोरेज के लिए अति आवश्यक है |

फोटोशॉप :-

यह एक प्रकार का एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर है , जिसकी सहायता से फोटो स्टूडियो वाले शॉपकीपर सभी प्रकार की फोटोस को एडिट करते हैं |

जैसे किसी को कार के पास खड़ा करना है , किसी का रंग साफ करना है , किसी की  ड्रेस बदलनी है , कोई पोस्टर को तैयार करना है , वेबसाइट का डिजाइन तैयार करना है ,

शादी का एल्बम तैयार करना है या डिजाइनिंग से रिलेटेड कोई भी काम,

इस सॉफ्टवेयर में बहुत ही अच्छी तरीके से तथा एक्यूरेसी से किया जा सकता है |

लेकिन इस सॉफ्टवेयर को उपयोग में लाने के लिए सबसे पहले इसे अच्छी तरीके से सीखना जरूरी है |

यह सीखने में थोड़ा जटिल है लेकिन सीखने के बाद किसी भी प्रकार का डिजाइनिंग का काम हम आसानी से कर सकते हैं |

पेजमेकर :-

यह एक एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर है , जिसकी सहायता से न्यूजपेपर एडिटर  अपने न्यूज़पेपर को लिखते हैं |

एक पेज बनाते हैं , उसको सेट करते हैं और पूरा न्यूज़ पेपर तैयार करते हैं |

इस सॉफ्टवेयर की सहायता से किसी भी प्रकार का जटिल पेज आसानी से तैयार किया जा सकता है ,

लेकिन पहले इसे सीखना पड़ता है |

कोरल ड्रा :-

यह एक एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर जिसकी सहायता से डिजाइनिंग का काम किया जाता है |

जैसे फ्लेक्स का डिजाइन करना हो , लोगो को डिजाइन करना हो  , फ्रंट पेज डिजाइन करना हो , टीशर्ट डिजाइन करनी हो |

इस  सॉफ्टवेयर में काम करना फोटोशॉप से बहुत ज्यादा आसान है लेकिन जिस लेवल का काम हम फोटोशॉप में कर सकते हैं ,

उस लेवल का काम  कोरल ड्रा में नहीं किया जा सकता है |

टैली  :-

यह भी एक एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर है |

इस सॉफ्टवेयर को अकाउंट्स का काम करने वाले व्यापारियों के द्वारा उपयोग किया जाता है |

इस सॉफ्टवेयर में व्यापार से संबंधित

सभी प्रकार के कार्य जैसे खाता बनाना , खाते में एंट्री करना , रसीद काटना , बैलेंस मिलाना आदि किए जा सकते हैं |

बिजी :-

यह भी एक एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर है |

इस सॉफ्टवेयर को अकाउंट का काम करने वाले व्यापारियों के द्वारा उपयोग में लाया जाता है |

लेकिन इसमें काम करना  टैली से ज्यादा आसान है,

क्योंकि इसमें सभी विजुअल कंपोनेंट्स होते हैं ,जिनको सीखना और याद रखना आसान होता है ,

और वह User-Friendly भी होते हैं | आजकल इस सॉफ्टवेयर का यूज बढ़ता जा रहा है |

इसमें काम करने से समय की बहुत बचत होती है |

इस प्रकार हमने समझा कि कंप्यूटर क्या है ? (What is Computer)  हिन्दी में |

शिक्षा के क्षेत्र में :-

शिक्षा के क्षेत्र में भी कंप्यूटर का बहुत ज्यादा यूज़ होता है |

पहले यदि किसी को कोई समस्या आती थी

तो उसे अध्यापक के पास पूछने के लिए जाना पड़ता था |

लेकिन आजकल ऐसी वेबसाइट अवेलेबल है जिनकी सहायता से आसानी से वह अपनी समस्या को सर्च करके सॉल्व कर सकता है |

इन वेबसाइट्स में दो प्रकार से सूचनाएं उपलब्ध होती हैं |

टेक्स्ट के रूप में :-

जिस स्टूडेंट को लिखा हुआ पढ़ कर ज्यादा समझ आता है वह इस तरीके से सीख सकता है |

वीडियो के रूप में :-

जिस स्टूडेंट को सुना व देखा हुआ ज्यादा आसानी से समझ में आता है वह इस तरीके से सीख सकता है|

उक्त दोनों तरीके ही विद्यार्थियों के लिए बेस्ट है और फ्री में उपलब्ध है |

उन्हें किसी भी प्रकार की कोई फीस देने की जरूरत नहीं है |

अपने घर में बैठे-बैठे आसानी से वह जो चाहे सीख सकते हैं |

इंटरनेट पर किसी भी चीज की कमी नहीं है , हम जो चाहे सीख  और  सिखा सकते हैं |

स्वास्थ्य के  क्षेत्र में :-

स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी कंप्यूटर का एक महत्वपूर्ण योगदान है |

आजकल बिना कंप्यूटर किसी भी प्रकार की रिपोर्ट तैयार नहीं की जाती है |

इससे स्पष्ट है कि कंप्यूटर का उपयोग किस हद तक आजकल होने लगा है |

हर प्रकार की बीमारी के लिए अलग-अलग प्रकार के कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर तैयार किए गए हैं ,

जिनकी सहायता से बड़े से बड़ी  बीमारी को आसानी से समझ कर , उसका इलाज किया जा सकता है |

अब डॉक्टर  को 50% काम ही करना पड़ता है , बाकी सब मशीनों के द्वारा कर दिया जाता है |

अतः कंप्यूटर के आने से स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई क्रांति आई है |

व्यापार के क्षेत्र में :-

व्यापार के क्षेत्र में भी कंप्यूटर का उपयोग दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है |

आजकल हर प्रकार का व्यापार कंप्यूटर के माध्यम से होने लगा है |

अगर किसी को कोई चीज की जरूरत होती है  तो वह बाजार में  ना  जाकर इंटरनेट पर उपलब्ध वेबसाइट में जाकर और उस चीज के लिए आर्डर करता है , क्योंकि वेबसाइट पर इंटरनेशनल रूप से लाखों ब्रांड की चीजें उपलब्ध हैं और वह आसानी से उनमें से देख कर अच्छी चीज ऑर्डर कर सकता है |

लेकिन हमारी लोकल मार्केट में हमें सीमित रूप से   चीज दिखाई जाती है और उन्हीं में से हमें लेनी पड़ती है , चाहे वह हमें पसंद आए या ना आए |

मनोरंजन के क्षेत्र में :-

मनोरंजन के क्षेत्र में भी कंप्यूटर का एक महत्वपूर्ण योगदान है |

पहले जो बच्चे ग्राउंड में खेलने जाते थे | आजकल ग्राउंड का दर्शन करना भी पसंद नहीं करते हैं , क्योंकि इंटरनेट की सहायता से मोबाइल पर या अपने पर्सनल कंप्यूटर पर हर प्रकार का गेम खेल सकते हैं |

बच्चे मोबाइल पर गेम खेलना पसंद इसलिए करते हैं क्योंकि यहां पर लाखों प्रकार के गेम अवेलेबल हैं |

यदि बच्चों को कोई गेम खेलना ना आए तो दूसरी वेबसाइट्स में जाकर उन्हें वह आसानी से सीख भी सकते हैं |

ऐसी बहुत सी वेबसाइट है , जो बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुसार ट्रेनिंग देती हैं |

ज्यादातर वेबसाइट में सब कुछ फ्री में अवेलेबल हैं , और कुछ वेबसाइट सिखाने  की फीस  भी लेती हैं |

सरकारी क्षेत्र में :-

सरकारी क्षेत्र में भी आजकल धीरे-धीरे कंप्यूटर का चलन बढ़ रहा है |

आजकल सभी प्रकार के सरकारी काम भी कंप्यूटर की सहायता से ऑनलाइन हो गए हैं |

इससे आम जनता को अपना सरकारी काम करना आसान हो गया है |

यदि किसी व्यक्ति को कोई भी सरकारी काम करवाना है , तो उन्हें दफ्तरों में जाने की जरूरत नहीं है |

वह घर पर बैठे बैठे आसानी से अपने कंप्यूटर में कर सकते हैं |

रक्षा के क्षेत्र में :-

रक्षा के क्षेत्र में कंप्यूटर का बहुत पहले से ही चलन बढ़ चुका है |

वैज्ञानिकों के द्वारा बड़े-बड़े सैटेलाइट , रॉकेट और विभिन्न प्रकार के वैज्ञानिक उपकरण कंप्यूटर की सहायता से आसानी से बनाए जा रहे हैं |

इंटरनेट की सहायता से आसानी से यह देखा जाता है कि उनके द्वारा भेजा गया यान क्या कर रहा है, उस यान के द्वारा जो भी इंफॉर्मेशन इकट्ठा की जाती है ,उसी समय वैज्ञानिकों के कंप्यूटर पर आ जाती है |

उन्हें किसी भी प्रकार का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है |

आजकल बिना कंप्यूटर के रक्षा का क्षेत्र अधूरा है|

मल्टीमीडिया के क्षेत्र में :-

मल्टीमीडिया के क्षेत्र में भी कंप्यूटर ने अहम भूमिका निभाई है, इसका सबसे बड़ा उदाहरण एनीमेशन हैं |

इन सब एनीमेशन को एनीमेशन सॉफ्टवेयर जो कि कंप्यूटर  पर रन किए जाते हैं, की सहायता से बनाया जाता है |

आजकल हर प्रकार की फिल्म में भरपूर मात्रा में एनिमेशन का यूज किया जाता है और ऐसे ऐसे सॉफ्टवेयर आ गए हैं ,

जिनकी सहायता से दिखाए गए दृश्य ऐसे होते हैं जिनका वास्तविकता से दूर-दूर  तक कोई लेना देना नहीं होता है |

हमें भी इसी प्रकार के दृश्य पसंद आते हैं |

मेडिकल क्षेत्र में :-

आजकल मेडिकल के क्षेत्र में  भी कंप्यूटर का  बहुत ज्यादा यूज़ हो रहा है |

बहुत से प्रकार के सॉफ्टवेयर तैयार किए जा चुके हैं , जो शरीर के हर हिस्से को आंतरिक और बाहरी दोनों तरीकों से चेक कर सकते हैं ,

और कहां क्या प्रॉब्लम है आसानी से डिटेक्ट कर सकते हैं |

इस प्रकार आपको पता लगा कि कंप्यूटर के क्या फायेदे है |

यदि अभी भी आपको यह आर्टिकल समझ नहीं आया हो तो मेरा यह हिंदी में वीडियो

देखिए आपको अच्छी तरीके से समझ में आ जाएगा,

हिंदी में वीडियो

क्या आपने इस  आर्टिकल को अच्छी तरीके से अपने दिमाग में बिठा लिया है ,  यदि हां तो अपने आप से निम्न प्रश्नों के उत्तर पूछिए?

  1. कंप्यूटर क्या है?
  2.  कंप्यूटर की पहली  जनरेशन की ड्यूरेशन क्या थी?
  3.  पहली पीढ़ी में कौन सा कंपोनेंट्स यूज किया जाता था?
  4.  दूसरी पीढ़ी में कौन सा कंपोनेंट यूज किया जाता था?
  5.  ट्रांजिस्टर कौन सी पीढ़ी में यूज किया जाता था?
  6.  वैक्यूम ट्यूब कौन सी पीढ़ी में यूज़ की जाती थी?
  7.  आईसी का विकास किसने किया था?
  8.  आईसी का विकास किस सन में किया गया था?
  9.  कंप्यूटर को बड़े  रूप से कितने भागों में बांटा गया है?
  10.  आकार के आधार पर कंप्यूटर कितने प्रकार के होते हैं?
  11.  उद्देश्य के आधार पर कंप्यूटर कितने प्रकार के होते हैं?
  12.  कार्यप्रणाली के आधार पर कंप्यूटर कितने प्रकार के होते हैं?
  13.  कंप्यूटर की किन्ही 5 इनपुट डिवाइसेज के नाम लिखो?
  14.  किन्हीं पांच आउटपुट डिवाइसेज के नाम लिखो?
  15.  कंप्यूटर के किन्हीं पांच हार्डवेयर कंपोनेंट्स के नाम लिखो?
  16.  रैम की फुल फॉर्म लिखो?
  17.  रोम की फुल फॉर्म लिखो?
  18.  कौन सी मेमोरी वोलेटाइल मेमोरी है?
  19.  कौन सी मेमोरी वोलेटाइल मेमोरी नहीं है?
  20.  स्थाई मेमोरी का एक उदाहरण लिखो?
  21.  अस्थाई मेमोरी का एक उदाहरण लिखो?
  22.  एसएमपीएस क्या काम आता है?
  23.  सीडी ड्राइव किस लिए काम में ली जाती है?
  24.  सीडी की फुल फॉर्म लिखो?
  25.  डीवीडी की फुल फॉर्म लिखो?
  26.  ओ एस की फुल फॉर्म लिखो?
  27.  फोटोशॉप क्या होता है?
  28.  ऑपरेटिंग सिस्टम क्या होता है?
  29.  सिस्टम सॉफ्टवेयर क्या होता है?
  30.  एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर क्या होता है?
  31.  ऐसी दो डिवाइसेज के नाम लिखो जो इनपुट और आउटपुट दोनों के लिए काम में ली जाती है?
  32.  रोम क्या काम आती है?
  33.  बिजी क्या काम आती है?
  34.  पेजमेकर पर किस प्रकार का काम किया जाता है?
  35.  एमएस ऑफिस में एम एस की फुल फॉर्म क्या होती है? 
  36.  यूपीएस की फुल फॉर्म क्या होती है?
  37.  ए एल यू की फुल फॉर्म क्या होती है?
  38. सीपीयू की फुल फॉर्म क्या होती है?
  39.  स्कैनर एक इनपुट या आउटपुट डिवाइस है?
  40.  ट्रांजिस्टर की खोज किसने की?
  41.  ट्रांजिस्टर की खोज कब की गई थी? 
  42. आई सी की खोज कब की गई थी?
  43.  आई सी की खोज किसने की थी?
  44. यू एल एस आई की फुल फॉर्म क्या होती है?
  45. जी यू आई की फुल फॉर्म क्या होती है?
  46.  सी एल आई की फुल फॉर्म क्या होती है?
  47. यूपीएस  की फुल फॉर्म क्या होती है?
  48. आईसी, वैक्यूम ट्यूब, तथा ट्रांजिस्टर में से  आकार में बड़ा कौन था?
  49.  आईसी, वैक्यूम ट्यूब, तथा ट्रांजिस्टर में से  कंप्यूटर  के आधार पर कौन सबसे अच्छा है?

50. कंप्यूटर का दिमाग किसे कहते हैं? 

इस आर्टिकल में हमने सीखा  कि कंप्यूटर क्या है -What is Computer In Hindi ?

अब आपने कितने प्रश्नों के उत्तर सही दिए, मुझे कमेंट में लिखकर बताइए |

यदि आपके उत्तर 80 परसेंट सही है तो ठीक है अन्यथा इस आर्टिकल को बार बार पढ़िए बाकी कंप्यूटर का बेसिक आपके दिमाग में अच्छी तरीके से बस जाए |

 यदि आपके दिमाग में किसी भी प्रकार की शंका है या कोई प्रश्न है तो आप पूछ सकते हैं |

मैं आपको जल्दी से जल्दी रिप्लाई करने की कोशिश करूंगा |

 यदि आपको कंप्यूटर साइंस मैथमेटिक्स स्पोकन इंग्लिश या टेक्निकल विषय के बारे में कुछ भी पूछना हो तो आप रिलैक्स हो कर पूछ सकते हैं ,

यदि मुझे आपका  उत्तर देने के लिए एक बड़ा आर्टिकल लिखना पड़ेगा तो भी मैं खुशी से यह करूंगा | 

 मैं चाहता हूं कि आप मेरे हर एक आर्टिकल को अपने दोस्तों में ज्यादा से ज्यादा शेयर करें

ताकि आपके सारे दोस्त आपको धन्यवाद बोले और अपना ज्ञान ज्यादा से ज्यादा  बढ़ाएं |

 यदि आपको मेरा आर्टिकल अच्छा लगता है तो आप इसे लाइक करके मुझे कोई न कोई कमेंट जरूर करें|

कम्प्युटर क्या है MCQ

 कई बार कम्प्युटर क्या है हिन्दी नोट्स के बारे में पूछा जाता है| इसलिए मैने पोस्ट के लास्ट में प्रिंटर का ऑप्शन दिया है वहाँ क्लिक करके आप इसके नोट्स प्रिंट निकाल सकते हो |

 

धन्यवाद ! 

 

 

 

 

 

 

 

5 COMMENTS

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